विधि · मूल देवनागरी पाठ

एकादशी व्रत पूजा विधि

Ekadashi Vrat Puja Vidhi

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01शीर्षक

एक दिन पहले (दशमी)

02पद

दशमी की शाम सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें; चावल न खाएँ।

03पद

पूजा के लिए तुलसी दल आज ही तोड़कर रख लें — एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।

04शीर्षक

एकादशी का दिन

05पद

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

06पद

पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की स्थापना करें, दीपक जलाएँ।

07पद

पंचामृत से स्नान कराएँ, चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।

08पद

भोग लगाएँ — भोग में तुलसी दल ज़रूर रखें।

09पद

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करें, विष्णु सहस्रनाम या उस एकादशी की कथा पढ़ें।

10पद

आरती "ॐ जय जगदीश हरे" करें।

11पद

दिन भर भजन-कीर्तन करें; क्रोध, निंदा और झूठ से बचें। हो सके तो रात में जागरण करें।

12शीर्षक

पारण (अगले दिन, द्वादशी)

13पद

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, पारण के शुभ समय में व्रत खोलें। (पारण का समय ऐप के पंचांग में दिखेगा।)

14पद

पहले भगवान को भोग लगाएँ, ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन/दान दें, फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।

आप जहाँ चाहें, वहीं रुक सकते हैं।

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